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Sunday, December 30, 2012



                                     जय मात्रभाषा
 कोई भी व्यक्ति जब भी कुछ सीखता है तो वह अपनी मात्रभाषा में ही सीखता है,भले ही वह धीरे-धीरे किसी अन्य भाषा का जानकार हो जाए और कुछ भी उस अन्य भाषा मे पढ़ ले समझ ले परंतु वह उस चीज के बारे मे उसे समझने के लिए कुछ भी सोंचता है तो अपनी भाषा मे सोंचता है, अतः व्यक्ति किसी दूसरी भाषा का कितना बड़ा जानकार क्यों ना  हो जाए परंतु वह उस भाषा में सोंच नही सकता,
अतः मात्रभाषा ही व्यक्ति को सीखने समझने योग्य बनाती है परंतु जिस भाषा के सहारे हमने दूसरी किसी भाषा को सीखा हम उसी भाषा को नज़रअंदाज कर देते हैं और उपेक्षित भी करते हैं जिसका परिणाम यह होता है की हम अपनी मात्रभाषा से विमुख हो जाते हैं यह कितना अपराध है की हमने जो कुछ भी सीखा अपनी मात्रभाषा के कारण सीखा परंतु दूसरी भाषा के चंद शब्दों का ग्यान होते ही हम उसे भूल गये बल्कि वह हमारे लिए निम्नस्तरीय भाषा भी हो गयी......... आज हमारी स्थति तो उस महा गरीब व्यक्ति की तरह है जिसके पास अपनी ज़बान ही नही है |
हम अंग्रेजी सीखते हैं तो उससे पहले हिन्दी सीखते हैं अतः हमारे लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण और आदरणीय हिन्दी है, परंतु आज हम अंग्रेजियत मे रंगकर मात्रभाषा को भूलते जेया रहे हैं फलतः हममे से कोई भी ना तो रामानुजन जन्म लेता है और ना ही सी0वी0रमन, हम राधकरष्णन और राजेन्द्र प्रसाद मदन मोहन मालवीय जैसी विभूतियों को आस पास देखना तो चाहते हैं परंतु वो बीज हम लोग बच्चों को उनकी मात्रभाषा से दूर कर खत्म कर रहे हैं |
अगर हम यह सोंचते हैं की अंग्रेजी के बिना प्रगती असंभव है तो कोरिया  अरब जर्मनी यूनान जैसे देश क्यों प्रगती-पथ पर बढ़ रहे हैं |मात्रभाषा की ओर बढ़ती असम्वेदना शर्म से डूब मरने का विषय है,क्योंकि व्यक्ति के ग्यान के व्रक्ष की जड़ें उसकी मात्रभाषा की भूमि मे ही स्थित होती हैं.......हमे भारतेंदु हरिश्चन्द्र जी के इस संदेश को नही भूलना चाहिए..........
                            निज भाषा उन्नति अहे,सभी ग्यान को मूल |
                           बिन निज भाषा ग्यान के ,मिटत हिय को शूल ||

Friday, December 28, 2012

कुछ एसी घटनाएँ है जोकि सरकार के अपराधों  से ज्यादा जनता की काहिलियत पेश करते हैं.................
जब बंबई मे हमला हुआ तब राहुल गांधी ने कहा की 1% आतंकवाद नही रुकेगा |

जातिगत जनगणना करवाई गई |

दिग्गी बोले की हमारी स्थिति अफ़ग़ानिस्तान से अच्छी है वाहा तो रोज हमले होते है यहा रोज नही होते |

जब भी किसी भी तरह का हमला होता है सरकार शोक प्रगट करती है ..बस |

26/11 के बाद भी ब्लास्ट हुए लेकिन हम लोग चुप रहे |

26/11 मे घायल कमांडो को पेंशन नही मिली लेकिन हम चुप रहे |

नेताओं के पास बुलेट प्रूफ जैकेट लेकिन पुलिसवालों के पास कुछ नही |

क्रिकेटरों को करोड़ों रुपये लेकिन शहीदों के घरवालों को कुछ लाख ..बस |

ताबूत घोटाला,कोयला घोटाला,एन आर एच एम घोटाला और भी बहुत कुछ लेकिन हम चुप रहे |

    इन  तमाम घटनाओं पर हमारी चुप्पी सिद्ध करती है कि हमे देश से कोई मतलब नही है हमारे उद्देश्य मात्र जानवरों की तरह रहना है


भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो : प्रचोदयात्
 




ऐ मातृभूमि! तेरी जय हो

ऐ मातृभूमि तेरी जय हो, सदा विजय हो
प्रत्येक भक्त तेरा, सुख-शांति-कांतिमय हो
अज्ञान की निशा में, दुख से भरी दिशा में
संसार के हृदय में तेरी प्रभा उदय हो

तेरा प्रकोप सारे जग का महाप्रलय हो
तेरी प्रसन्नता ही आनंद का विषय हो

वह भक्ति दे कि 'बिस्मिल' सुख में तुझे न भूले
वह शक्ति दे कि दुख में कायर न यह हृदय हो